जीवन विचार - 1. हमेँ अपने जीवन मेँ सदविचार व सदमार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
2. वर्तमान मेँ युवाओँ मेँ भटकाव की दशा बनी हुई हैँ। इसका
कारण है कि वर्तमान मेँ उनके सामने कोई सक्षत व ठोस उदाहरण नहीँ हैँ तथा
गाँधी, सुभाष जैसे उदाहरण काफी पीछे छूट चुके हैँ।
3. आज के इस तेज रफ्तार वाले युग मेँ माता पिता भी बच्चोँ को पर्याप्त समय देकर उनका मार्गदर्शन व उनके आइडियल अर्थात् आदर्श नहीँ बन पा रहेँ हैँ।
जीवन समस्याओँ का निवारण - 1. जीवन को सही दिशा देने के लिए आदर्शात्मक व चरित्रात्मक कथा, प्रसंगोँ का पठन-पाठन किया जाना चाहिए।
2. हमेँ यह निश्चय करना चाहिए कि हम अपने स्तर पर किसी भी सामाजिक बुराई का हिस्सा नहीँ बनेंगे।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
51 comments:
बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
खबरनामा की ओर से आभार
behtareen, vicharneey, prerak vichar.
बहुत अच्छा लगा।
आदर्शोनमुख आलेख - अति सुन्दर.
अति सुन्दर विचार और शिक्षा
सुन्दर आलेख ...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच ।
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर की जाएगी!
सूचनार्थ!
shi bat hai shanti aaj ka insan apna time sirf paison ke liye barbad kr rha hai bachchon ke liye samay kahan?
सार्थक रचना..
Bahut sundar blog aur sarthak pryas. Swagat.
सार रूप प्रस्तुत कर दिए आपने जीवन सूत्र .शुक्रिया दिल से .आज की गिरावट की वजह भ्रष्ट आइकोन ही हैं .
जीवन समस्याओँ का निवारण - 1. जीवन को सही दिशा देने के लिए आदर्शात्मक व चरित्रात्मक कथा, प्रसंगोँ का पठन-पाठन किया जाना चाहिए।
2. हमेँ यह निश्चय करना चाहिए कि हम अपने स्तर पर किसी भी सामाजिक बुराई का हिस्सा नहीँ बनेंगे।
बहुत सुंदर प्रस्तुति । धन्यवाद ।
बहुत सार्थक प्रस्तुति...
बहुत सही कहा आपने
सच्ची बातें...
बहुत सही बात! ईष्ट और आदर्श का जीवन में होना अत्यंत ही आवश्यक है!
प्रेरक प्रस्तुति...
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक आभार!
जरुरत है उन पीछे छोड़ दिए गए आदर्शों के पुनर्स्थापना की..
जय हिंद वन्दे मातरम
जरुरत है उन पीछे छोड़ दिए गए आदर्शों के पुनर्स्थापना की,,,
जय हिंद वन्दे मातरम
बहुत सार्थक विचार..
सटीक और सार्थक बात कही है ... पहले मटा पिता को ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए तभी बच्चों में संस्कार आते हैं
nice thought....
प्रेरणादायक प्रस्तुति !
बहुत सुंदर !
आभार !
sarthak vichar ke liye dhanyvad
sunder vichar hain......
बेहद सार्थक विचार..
आभार.
हमारे आचरण से ही गढ़े जा सकेंगें नए आइकोन निये प्रतिमान नए आदर्श पुरुष शुभ्यंकर .
bahut badiya prerak vichar..
shanti ji pehle to aapko namaskar kehna chhunga. aap jo keh rahi hai wo ek dum sahi hai. mera bhi yahi manna hai ki gar sab pehle ki trha ho jaye to kitna accha ho kalug ko chhoud kar gar hum thoda bhi satyug ko apna le to sab kitna accha lagega
सुन्दर विचार :-)
बेहतरीन आलेख :-)
प्रस्तुति अच्छी लगी ।.मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार है । धन्यवाद ।
विचारणीय ..
सही विचार रक्खा है शांति जी आपने. इसकी शुरुआत तो माता पिता और घर से ही करनी होगी.
shanti ji
bahut sundar aur saarthak baat kahee aapne!
mere blog pe aane ke liye haardik shukriyaa, main to aapka follower bann gaya hoon so ab aata hee rahungaa!!!
आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा। जीवन विचार बेहद पसंद आए।
सार्थक सोच ,विचारों के लिए ....!
शुभकामनाएँ!
बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना, शुभकामनाएँ।
mere blog par aane ka aabhar..../
aapka post sammaj ko ek disha de sakta hai ..//
बहुत खूब लिखा है.. बहुत सुन्दर..
इस दिशा में माता-पिता, परिवार और शालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ।
shanti ji ek ek bat sateek likhi hai aapne .aabhar
प्रेरक विचार...
बधाई.
सार्थक विचार ... सही कहा ही की आज कोई आदर्श नहीं है जिसका अनुसरण आज की पीड़ी कर सके ...
kam shabdon ka sahaara lekar ek upyogi post... pahli baar ayaa hun par achha laga....
प्रभावशाली विचार !
रंगोत्सव की शुभकामनायें स्वीकार करें !
sarthak sandesh dete sarthak vichar
aap ka main bhut 2 hardik aabhar vykt krta hoon
aap antha mt len
mera ek vyng lekh -"marg drshn "-prvasiduniya.com pr hai kripya use ek bar dekhne ka ksht kren aabhar ke sath
dr.ved vyathit
09868842688
dr.vedvyathit@gmail.com
सुन्दर विचार.
बहुत सुंदर प्रस्तुति । धन्यवाद
सुन्दर, सामयिक और सार्थक पोस्ट, आभार.
मेरे ब्लॉग meri kavitayen पर आपका हार्दिक स्वागत है, कृपया पधारें.
Rightly said...We should try to be better human beings...
बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
Post a Comment