Friday, February 10

जीवन विचार और समस्या निवारण।

जीवन विचार - 1. हमेँ अपने जीवन मेँ सदविचार व सदमार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
2. वर्तमान मेँ युवाओँ मेँ भटकाव की दशा बनी हुई हैँ। इसका
कारण है कि वर्तमान मेँ उनके सामने कोई सक्षत व ठोस उदाहरण नहीँ हैँ तथा
गाँधी, सुभाष जैसे उदाहरण काफी पीछे छूट चुके हैँ।
3. आज के इस तेज रफ्तार वाले युग मेँ माता पिता भी बच्चोँ को पर्याप्त समय देकर उनका मार्गदर्शन व उनके आइडियल अर्थात् आदर्श नहीँ बन पा रहेँ हैँ।

जीवन समस्याओँ का निवारण - 1. जीवन को सही दिशा देने के लिए आदर्शात्मक व चरित्रात्मक कथा, प्रसंगोँ का पठन-पाठन किया जाना चाहिए।
2. हमेँ यह निश्चय करना चाहिए कि हम अपने स्तर पर किसी भी सामाजिक बुराई का हिस्सा नहीँ बनेंगे।

51 comments:

ख़बरनामा said...

बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
खबरनामा की ओर से आभार

अनामिका की सदायें ...... said...

behtareen, vicharneey, prerak vichar.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छा लगा।

Kewal Joshi said...

आदर्शोनमुख आलेख - अति सुन्दर.

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

अति सुन्दर विचार और शिक्षा

avanti singh said...

सुन्दर आलेख ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर की जाएगी!
सूचनार्थ!

NISHA MAHARANA said...

shi bat hai shanti aaj ka insan apna time sirf paison ke liye barbad kr rha hai bachchon ke liye samay kahan?

Sunil Kumar said...

सार्थक रचना..

अभिषेक मिश्र said...

Bahut sundar blog aur sarthak pryas. Swagat.

veerubhai said...

सार रूप प्रस्तुत कर दिए आपने जीवन सूत्र .शुक्रिया दिल से .आज की गिरावट की वजह भ्रष्ट आइकोन ही हैं .

प्रेम सरोवर said...

जीवन समस्याओँ का निवारण - 1. जीवन को सही दिशा देने के लिए आदर्शात्मक व चरित्रात्मक कथा, प्रसंगोँ का पठन-पाठन किया जाना चाहिए।
2. हमेँ यह निश्चय करना चाहिए कि हम अपने स्तर पर किसी भी सामाजिक बुराई का हिस्सा नहीँ बनेंगे।

बहुत सुंदर प्रस्तुति । धन्यवाद ।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति...

vandana said...

बहुत सही कहा आपने

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सच्ची बातें...

Madhuresh said...

बहुत सही बात! ईष्ट और आदर्श का जीवन में होना अत्यंत ही आवश्यक है!

ऋता शेखर मधु said...

प्रेरक प्रस्तुति...
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक आभार!

आशुतोष की कलम said...

जरुरत है उन पीछे छोड़ दिए गए आदर्शों के पुनर्स्थापना की..

जय हिंद वन्दे मातरम

आशुतोष की कलम said...

जरुरत है उन पीछे छोड़ दिए गए आदर्शों के पुनर्स्थापना की,,,

जय हिंद वन्दे मातरम

Kailash Sharma said...

बहुत सार्थक विचार..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक और सार्थक बात कही है ... पहले मटा पिता को ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए तभी बच्चों में संस्कार आते हैं

JEEWANTIPS said...

nice thought....

मनीष सिंह निराला said...

प्रेरणादायक प्रस्तुति !
बहुत सुंदर !
आभार !

Dr. sandhya tiwari said...

sarthak vichar ke liye dhanyvad

mridula pradhan said...

sunder vichar hain......

vidya said...

बेहद सार्थक विचार..
आभार.

veerubhai said...

हमारे आचरण से ही गढ़े जा सकेंगें नए आइकोन निये प्रतिमान नए आदर्श पुरुष शुभ्यंकर .

कविता रावत said...

bahut badiya prerak vichar..

Mukesh Garg said...

shanti ji pehle to aapko namaskar kehna chhunga. aap jo keh rahi hai wo ek dum sahi hai. mera bhi yahi manna hai ki gar sab pehle ki trha ho jaye to kitna accha ho kalug ko chhoud kar gar hum thoda bhi satyug ko apna le to sab kitna accha lagega

Reena Maurya said...

सुन्दर विचार :-)
बेहतरीन आलेख :-)

प्रेम सरोवर said...

प्रस्तुति अच्छी लगी ।.मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार है । धन्यवाद ।

shikha varshney said...

विचारणीय ..

रचना दीक्षित said...

सही विचार रक्खा है शांति जी आपने. इसकी शुरुआत तो माता पिता और घर से ही करनी होगी.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

shanti ji
bahut sundar aur saarthak baat kahee aapne!
mere blog pe aane ke liye haardik shukriyaa, main to aapka follower bann gaya hoon so ab aata hee rahungaa!!!

Vipin said...

आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा। जीवन विचार बेहद पसंद आए।

यादें....ashok saluja . said...

सार्थक सोच ,विचारों के लिए ....!
शुभकामनाएँ!

ख़बरनामा said...

बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना, शुभकामनाएँ।

babanpandey said...

mere blog par aane ka aabhar..../
aapka post sammaj ko ek disha de sakta hai ..//

amrendra "amar" said...

बहुत खूब लिखा है.. बहुत सुन्दर..

आशा जोगळेकर said...

इस दिशा में माता-पिता, परिवार और शालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ।

शिखा कौशिक said...

shanti ji ek ek bat sateek likhi hai aapne .aabhar

Dr (Miss) Sharad Singh said...

प्रेरक विचार...
बधाई.

दिगम्बर नासवा said...

सार्थक विचार ... सही कहा ही की आज कोई आदर्श नहीं है जिसका अनुसरण आज की पीड़ी कर सके ...

अभिषेक प्रसाद said...

kam shabdon ka sahaara lekar ek upyogi post... pahli baar ayaa hun par achha laga....

सतीश सक्सेना said...

प्रभावशाली विचार !
रंगोत्सव की शुभकामनायें स्वीकार करें !

मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली said...

sarthak sandesh dete sarthak vichar

vedvyathit said...

aap ka main bhut 2 hardik aabhar vykt krta hoon
aap antha mt len
mera ek vyng lekh -"marg drshn "-prvasiduniya.com pr hai kripya use ek bar dekhne ka ksht kren aabhar ke sath
dr.ved vyathit
09868842688
dr.vedvyathit@gmail.com

Rajput said...

सुन्दर विचार.
बहुत सुंदर प्रस्तुति । धन्यवाद

S.N SHUKLA said...

सुन्दर, सामयिक और सार्थक पोस्ट, आभार.

मेरे ब्लॉग meri kavitayen पर आपका हार्दिक स्वागत है, कृपया पधारें.

Saru Singhal said...

Rightly said...We should try to be better human beings...

udaya veer singh said...

बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....